← वापस जाएँ

कविता

मध्य लोक और जंबूद्वीप का दिव्य दर्शन

मेरुतुंग के चारों ओर सजते द्वीप अनूप, दक्षिण दिशा में जंबूद्वीप लहे दिव्य स्वरूप।

मध्य लोक की इस रचना में, मेरु सुमेरु विराजे हैं, चारों दिशि संकेंद्रित द्वीप, शांत ज्योति फैलाते हैं। दक्षिण तट पर जंबूद्वीप की महिमा अपरम्पार, भारतवर्ष बसा जिसके भीतर, संतों का आगार। उत्तर दिशा में हिमगिरि पर्वत, मुकुट सा शोभा पाता है, दक्षिण में लवण समुद्र नीर, चरण पखार जाता है। शांत भाव से जो देखे इस रचना का विस्तार, उसके मन में उतर आता, परमसत्य का सार।

अधिक रचनाएँ